Thursday, 10 July 2014

नींबू : गुण में मीठा, स्वाद में खट्टा

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* सुबह-शाम एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर पीने से मोटापा दूर होता है।

* बवासीर (पाइल्स) में रक्त आता हो तो नींबू की फांक में सेंधा नमक भरकर चूसने से रक्तस्राव बंद हो जाता है।

* आधे नींबू का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर चाटने से तेज खाँसी, श्वास व जुकाम में लाभ होता है।

* नींबू ज्ञान तंतुओं की उत्तेजना को शांत करता है। इससे हृदय की अधिक धड़कन सामान्य हो जाती है। उच्च रक्तचाप के रोगियों की रक्तवाहिनियों को यह शक्ति देता है।

* एक नींबू के रस में तीन चम्मच शकर, दो चम्मच पानी मिलाकर, घोलकर बालों की जड़ों में लगाकर एक घंटे बाद अच्छे से सिर धोने से रूसी दूर हो जाती है व बाल गिरना बंद हो जाते हैं।

* एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम दो बार नित्य एक महीना पीने से पथरी पिघलकर निकल जाती है।

* नींबू को तवे पर रखकर सेंक लें (दो भाग करके)। उस पर सेंधा नमक डालकर चूसें। इससे पित्त की दिक्कत खत्म होती है।

गर्मी में लड़कियों के लिए खास टिप्स

गर्मी में लड़कियों के लिए खास टिप्स
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गर्मी ने सबका हाल बेहाल करना शुरू कर दिया है। इसका असर बच्चों व बूढ़ों पर पड़ा है, तो महिलाएं भी इससे अछूती नहीं रही हैं।

कामकाजी महिलाओं और लड़कियों को गर्मी के मौसम में बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां हम महिलाओं को गर्मी से बचने के कुछ उपाय बता रहे हैं।

1. धूप में बाहर जाने से 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाएं। यह आपको सनबर्न, स्कीन टैन आदि से बचाएगा। आपका सनस्क्रीन SPF15 या उससे ज्यादा का होना चाहिए।
2. इसके साथ जब भी बाहर जाएं तो गॉगल, हैंड ग्लव्स और स्कॉर्फ भी पहनें।

आइस क्यूब्स : गर्मियों के लिए सही उपाय

आइस क्यूब्स : गर्मियों के लिए सही उपाय
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ठंडे और वर्ग क्यूब्स भी कई तरह से सौंदर्य के लिए लाभकारी हैं।

आइस क्यूब्स गर्मियों के लिए सही उपाय हैं और जो लोग अब तक इस बारे में जागरूक नहीं थे, उनके लिए जानकारी है कि बर्फ से सुंदरता में काफी लाभ होता है और विशेष रूप से गर्मियों में त्वचा के लिए बर्फ बहुत अच्छी है।

आपकी खूबसूरती में चार चांद लगाएंगे आसान ब्यूटी टिप्स

आपकी खूबसूरती में चार चांद लगाएंगे आसान ब्यूटी टिप्स
ब्यूटी केयर टिप्स : कॉस्मेटिक गाइड बनाएं आपको खूबसूरत
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वैसे तो आजकल मार्केट में मल्टीपरपज कॉस्मेटिक्स उपलब्ध हैं, जैसे कि मॉइश्चराइजर और सनस्क्रीनयुक्त फाउंडेशन, थ्री इन वन लिपस्टिक, ग्लास और टिंट। लेकिन थोड़ा-सा ट्रिक अप्लाई करें तो आप अपने रेग्युलर कॉस्मेटिक्स को भी मल्टीपरपज बना सकती हैं।

1. फाउंडेश

* इसे आप मॉइश्चराइजर, प्राइमर या हाईलाइटर के तौर पर इस्तेमाल कर सकती हैं।
* मॉइश्चराइजर में थोड़ा-सा फाउंडेशन मिक्स करके अप्लाई करें। इससे आपको परफेक्ट फिनिश्ड लुक मिलेगा।
* आई शेडो लगाने से पहले फाउंडेशन को आईलिड पर प्राइमर की तरह यूज करें। इसके लिए फाउंडेशन के डॉट्स लिड पर अप्लाई करें और अच्छी तरह ब्लैंड करें।

बालों का झड़ना रोकें

बालों का झड़ना रोकें  
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बच्चे को जन्म देना एक स्त्री का नया जन्म होता है। प्रायः विवाह के पश्चात ससुराल वालों की अपेक्षाओं पर खरे उतरने का एक मनोवैज्ञानिक दबाव महिलाओं पर होता है। साथ ही नई दिनचर्या में स्वयं को ढालना भी एक बड़ा काम होता है।

इस समय स्त्री अपने स्वास्थ्य और सौंदर्य का ठीक से ध्यान नहीं रख पाती। प्रसव के पश्चात अत्यधिक बाल झड़ने का प्रमुख कारण है आयरन एवं कैल्शियम आदि पोषक तत्वों का अभाव एवं उचित आराम का न मिल पाना। बच्चे के पैदाइश की पूरी प्रक्रिया में स्त्री के शरीर में कई प्रकार के परिवर्तन होते हैं।

पहले तीन महीने फोलिक एसिड की गोली एवं उसके बाद आयरन एवं कैल्शियम की गोलियां डॉक्टर की सलाह पर गर्भावस्था में ली जानी चाहिए। इससे शिशु के साथ ही बालों के स्वास्थ्य पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही गर्भावस्था के समय स्त्रावित होने वाले हार्मोन के कारण भी बालों का स्वास्थ्य सुधरता है।

चमकदार बालों के लिए नेचुरल टिप्स

Hair Care Tips in Hindiचमकदार बालों के लिए नेचुरल टिप्स
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सुन्दर, काले व चमकदार बाल नारी की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। पुराने समय में बालों के रखरखाव व निखार के लिए नारियां अनेक तरीके इस्तेमाल में लाती थीं, जिनसे बाल वास्तव में ही काले, घने, मजबूत और चमकदार बनते थे।

लेकिन आज के युग में कई तरह के साबुन और अन्य चीजों को बालों की सार-संभाल के लिए प्रयोग में लाया जाने लगा है। इनसे बाल पोषक तत्व हासिल करने के स्थान पर समय से पूर्व टूट कर गिरने लगते हैं, साथ ही सफेद होने लगते हैं।

हम अपने पाठकों को बालों के रख-रखाव के बारे में कुछ ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां दे रहे हैं, जिन्हें इस्तेमाल में लाकर बालों को सुदृढ़, काले और चमकदार बनाया जा सकता है।

* भूलकर भी अपने सिर के बालों के साथ ज्यादा एक्सपेरिमेंट न करें। ऐसा करने से बाल कमजोर होकर असमय टूटने लगते हैं।

* बालों की साफ-सफाई में लापरवाही न बरतें। याद रखें कि पसीना बालों की जड़ों में पहुंचने पर बालों को नुकसान पहुंचाता है। इससे बचने के लिए हफ्ते में कम से कम दो बार बालों की सफाई जरूर करें।

Hair Care Tips in Hindi
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* बालों में अक्सर रूसी की समस्या उत्पन्न हो जाया करती है जिससे बाल बेजान होकर टूटने लगते हैं। इससे छुटकारा पाने के लिए सबसे पहले बालों में अच्छी तरह तेल लगा लें, ‍फिर गर्म पानी में भीगे तौलिए से बालों को भाप दें। ऐसा करने से बालों की रूसी खत्म हो जाएगी।

* प्रयोग में लाई गई चाय की पत्ती को थोड़े से पानी में उबाल लें। इसके ठंडा होने पर इसे बालों में लगाएं। हफ्ते में कम से कम एक बार इस क्रिया को जरूर करें। इस क्रिया को करने से बाल मजबूत हो जाएंगे।

* खट्टी दही में चुटकी भर फिटकरी मिला लें, साथ ही थोड़ी सी हल्दी भी मिला लें। इस मिश्रण को सिर के बालों में लगाने से सिर की गंदगी तो दूर होती ही, साथ ही सिर में फैला संक्रमण भी दूर होता है। इस क्रिया को करने से सिर के बाल निखर उठते हैं।

मॉनसून में कैसे करें बालों की देखभाल

मॉनसून में कैसे करें बालों की देखभाल

बारिश का मौसम बहुत अच्छा होता है। हर तरफ हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता फैली होती है। लेकिन इसी मौसम में बालों की कई समस्याएं पैदा हो जाती है जैसे बालों का टूटना और झड़ना इनकी आम समस्या है, क्योंकि बारिश का पानी बालों के लिए अच्छा नहीं होता है।

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ज्यादा देर तक स्कल्प का गीला रहना बालों की अनेक समस्याओं को जन्म देता है। हम आपको कुछ हेयर केयर टिप्स बता रहे हैं जिन्हें आजमा कर आप अपने बालों को मानसून में भी हेल्दी रख सकतीं हैं।

- अगर आपके बाल बारिश के पानी में अक्सर गीले हो जाते है तो आपको उन्हें शैम्पू से जरूर धोना चाहिए नहीं तो बारिश के पानी से पैदा हुई नमी फंगस का रूप ले लेगी।

- गीले बालों को बड़े दांत वाले कंघे से सुलझाएं।

पुदीना-तुलसी से कैंसर का सफाया

पुदीना-तुलसी से कैंसर का सफाया

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भारत में तुलसी का पौधा सदियों से विशिष्ट जगह बनाए हुए है, वहीं पुदीना भी भारतीयों के बीच काफी लोकप्रिय है। राजस्थान विश्वविद्यालय के 10 छात्रों ने तुलसी और पुदीना के कैंसररोधी गुणों पर शोध किया। शोध करने वाली टीम चूहों पर 6 महीनों के शोध के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंची कि तुलसी और पुदीना कैंसररोधी गुणों से भरपूर हैं। इस शोध का अनपेक्षित निष्कर्ष निकला है। चूहों पर इन दोनों उत्पादों का सकारात्मक असर दिखाई दिया।

चूहों को दो समूहों में विभाजित किया गया। इसके बाद एक समूह पर रासायनिक लेप लगाया गया, जबकि दूसरे समूह पर तुलसी और पुदीने का लेप लगाया गया। एक महीने बाद देखा कि जिन चूहों पर तुलसी और पुदीने का लेप नहीं लगाया गया था, उनके शरीर पर कई गहरे जख्म बन गए। जिन चूहों को पुदीना और तुलसी का लेप लगाया गया था उन पर 11 महीने बाद ऐसे जख्म हुए। जाहिर है इससे दूसरे समूह के चूहों की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ गई।

तुलसी
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टीम ने सबसे पहले त्वचा कैंसर पर पुदीना और तुलसी के असर का अध्ययन किया। इसके बाद चूहों के फेफ़ड़े और आंत पर इन दोनों उत्पादों के असर का अध्ययन किया। वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि जिन चूहों को पुदीना और तुलसी का लेप नियमित तौर पर लगाया गया, उनकी कैंसर से लड़ने की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ गई।

कैंसर तब होता है जब शरीर में पाए जाने वाले फ्री रेडिकल किसी कोशिका की आनुवांशिक बनावट को असंतुलित बना देते हैं। इससे कोशिका विभाजन की प्रक्रिया काफी तेज हो जाती है। पुदीना और तुलसी में कई तरह के पाचक तत्व भी पाए गए हैं, जो फ्री रेडिकल को नष्ट कर सकते हैं। बबूल और गोखरू के पौधों में भी कैंसर-निरोधक इंजाएम पाए जाते हैं।

सावधान, साड़ी से हो सकता है कैंसर कैंसर का नया रूप : साड़ी कैंसर

सावधान, साड़ी से हो सकता है कैंसर
कैंसर का नया रूप : साड़ी कैंसर
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भारतीय महिलाओं की सुंदरता में चार चांद लगाती साड़‍ियां अब महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हो रही हैं। भारत का यह परंपरागत पहनावा अब कैंसर का कारण बन चुका हैं।

आपने सोचा भी नहीं होगा कि साड़ी भी कैंसर का कारण हो सकती है, लेकिन यह सच है। मुंबई के एक अस्पताल मे डॉक्टर्स ने इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया है कि इन दिनों भारतीय महिलाएं साड़ी की वजह से कैंसर का शिकार हो रही हैं। उन्होंने इस कैंसर को साड़ी कैंसर नाम दिया है।

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कैंसर की मुख्य वजह पेटिकोट के नाड़े का हमेशा एक ही जगह बांधा जाना है। पेटिकोट के नाड़े को ‍हरदिन एक ही जगह बांधे जाने पर महिलाओं की वेस्टलाइन पर जलन होने लगती है, धीरे-धीरे इस जलन से वेस्टलाइन पर पिगमेंटेशन हो जाता है। अधिकांश महिलाएं इस ओर तब तक ध्यान नहीं देती जब तक कि यह एक गांठ में न परिवर्तित हो जाए और फिर यही गांठ कैंसर का रूप ले लेती है।

डॉक्टर्स ने महिलाओं को कैंसर से बचने के लिए उन्हें पेटिकोट में मोटे नाड़े के इस्तेमाल और नाड़े को रोज अलग-अलग जगह बांधने की सलाह दी है।

सेहत के लिए फायदेमंद चुगलखोरी

सेहत के लिए फायदेमंद चुगलखोरी
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आमतौर पर चुगलखोर आदमी को अच्छा नहीं माना जाता है लेकिन एक ताजा अध्ययन की मानें तो कभी-कभी चुगलखोरी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद भी होती है। इससे तनाव दूर होता है और बुरी आदतों पर लगाम लगती है।

बार्कले यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में बताया है कि ऐसे लोग जो चुगलखोर होते हैं खासकर जिनकी आदत बुरी होती है, वे सामाजिक आदत को बरकरार रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं और ऐसे लोग खुद को तनाव से दूर रखते हैं।

जर्नल ऑफ पर्सनैलिटी एंड सोशल साइकोलॉजी जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ताओं ने चुगलखोरी से संबंधित अध्ययन को कई क्रम में अंजाम दिया। अपने पहले अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 51 लोगों को शामिल किया। इन लोगों से गेम खेलते खिलाड़‍ियों के स्कोर को चेक करने के लिए कहा गया। इसी समय इनके दिल की धड़कन की माप ली गई।

मुंहासों का इलाज, बस खुश रहें आप

मुंहासों का इलाज, बस खुश रहें आप

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किशोरावस्था में मुंहासे होने का कारण शरीर में होने वाले हार्मोंस से संबंधित बदलाव होते हैं। इसके अलावा इस उम्र में बच्चे तनाव का शिकार भी जल्दी होते हैं। पीयर प्रेशर और हमेशा सुंदर दिखने का दबाव उन पर रहता है।

यही वजह है कि टीनएजर मुंहासे होने पर गहरे तनाव में घिर जाते हैं। ऐसी स्थिति में माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों पर इससे होने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभावों को समझें और जानें। जो माता-पिता बच्चों की इस समस्या को उचित मार्गदर्शन से सही कर सकते हैं उनके बच्चे इस समस्या से उबर सकते हैं।

मुंहासे जवानी में भी हो सकते हैं। लगभग 50 प्रश जवान महिलाएं और 25 प्रश पुरुषों को जवानी में यह समस्या निरंतर जकड़े रहती है। कई महिलाएं तो इनके कारण डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं। इन मुंहासे के होने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे वातावरण का प्रभाव, शारीरिक और हारमोन्स से संबंधित होने वाले बदलाव वगैरह। जिस समय व्यक्ति तनावग्रस्त होता है तो शरीर में कोर्टिसोल हार्मोंस का स्राव बढ़ जाता है जिसके कारण शरीर में त्वचा की ग्रंथियों से सीवम नामक हारमोन का स्राव ज्यादा होने लगता है जिसके कारण मुंहासे होते हैं।

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इसके अलावा यह ब्लैक हेड्स और व्हाइट हेड्स होने का भी कारण हो सकता है। अतः तनाव को बेहतर तरीके से हैंडल करना चाहिए। तनाव का प्रभाव शरीर पर न पड़े इसके लिए खुश रहें और पूरा आराम करें। पर्याप्त आराम, एक्सरसाइज और सकारात्मक नजरिए से तनाव पैदा होने वाली तमाम स्थितियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। छोटी-छोटी चीजों में खुशी तलाशें। याद रखें, खुश रहने से हमारी त्वचा भी खिलखिलाती रहती है। खुश रहने के लिए अपने और अपने परिवार के लोगों को तनाव से बचाने के लिए अपने वीकेंड को अच्छे ढंग से प्लान करें।

मुंहासों की समस्या यदि ज्यादा गंभीर होने लगे तो इसके लिए डॉक्टर से परामर्श करें। अपने भोजन और लाइफ स्टाइल में बदलाव करें। रिफाइंड काब्रोहाइडे्रट युक्त आहार व कैफीन मात्रा में लें। लो-फैट डाइट लें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। मुंहासे की समस्या को देखने का हर व्यक्ति का अपना नजरिया होता है। कुछ लोगों को यह एक बड़ी गंभीर समस्या लगती है उन्हें लगता है कि इससे उनका चेहरा भद्दा लगता है। इन्हें देखकर उन्हें गुस्सा आता है और वे तनावग्रस्त हो जाते है। स्त्री, पुरुष, किसी भी आयु वर्ग के, किसी भी देश के व्यक्ति मुंहासों की जद में आ सकते है।

एक ग्लास दूध, दिमाग को रखे चुस्त ब्रेन पावर के लिए एक ग्लास दूध काफी है

एक ग्लास दूध, दिमाग को रखे चुस्त
ब्रेन पावर के लिए एक ग्लास दूध काफी है

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इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितनी उम्र के हैं। यदि आप अपने दिमाग को चुस्त-दुरुस्त बनाना चाहते हैं तो रोजाना एक ग्लास दूध पीना शुरू कर दीजिए। ऐसा करने से दिमागी क्षमता तेज होगी। एक ताजा अध्ययन में कहा गया है कि दूध न सिर्फ पोषक तत्वों से भरपूर रहता है बल्कि इससे ब्रेन पावर पर सकारात्मक असर पड़ता है और मानसिक क्षमता तेज होती है।

अध्ययन के मुताबिक डेयरी उद्योगों में दूध में मिलाए जाने वाला अन्य पोषक तत्व जैसे कि मैगनेशियम आदि से याददाश्त क्षमता मजबूत होती है। यह दिल की बीमारी और ब्लडप्रेशर से भी लोगों को बचाता है। यह ठीक तरह से काम करने के लिए दिमाग की क्षमता को बरकरार रखता है।

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यूनिवर्सिटी ऑफ मायने के शोधकर्ताओं ने पाया है कि जो वयस्क अधिक दूध पीते हैं उनकी स्मरण शक्ति उन लोगों की तुलना में काफी बेहतर होती है, जो कम दूध पीते हैं। दूध का अधिक सेवन करने वाले लोग उन लोगों की तुलना में पांच गुना अधिक सक्रिय और स्मरण शक्ति के लिहाज से बेहतर होते हैं, जो कम दूध पीते हैं।

इंटरनेशनल डेयरी जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक यूनिवर्सिटी ऑफ मायने में किए गए एक शोध से यह बात साबित हो चुकी है कि जो लोग रोजाना कम से कम एक ग्लास दूध पीते हैं, वे उन लोगों की तुलना में हमेशा मानसिक और बौद्धिक तौर पर बेहतर स्थिति में होते हैं, जो दूध का सेवन नहीं करते।

अच्छे नंबर लाना है तो खेलो-कूदो..!

अच्छे नंबर लाना है तो खेलो-कूदो..!
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दौड़ने-कूदने से शरीर तो स्वस्थ रहता ही है, मस्तिष्क पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नीदरलैंड में किए गए एक अनुसंधान में पाया गया है कि जो बच्चे खेलकूद में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, वे परीक्षा में अंग्रेजी, गणित आदि विषयों में बेहतर अंक भी लाते हैं। यह अनुसंधान बारह हजार बच्चों पर किया गया था।

निष्कर्ष के तौर पर कहा गया कि शारीरिक कसरत से मस्तिष्क में रक्त व ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ जाती है। इससे मस्तिष्क पढ़ाई के लिहाज से भी तरो-ताजा रहता है। साथ ही कसरत से ऐसे हार्मोनों का स्त्राव होता है जो तनाव दूर करते हैं और मूड बेहतर बनाते हैं।

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ये सभी कारक मस्तिष्क को चुस्त-दुरुस्त रखते हैं। यही नहीं, मनोविश्लेषकों ने पाया है कि जो बच्चे खेलकूद में भाग लेते हैं, उनमें इसी बहाने नियम-कायदों का पालन करने की आदत भी पड़ जाती है। यह आदत स्कूल में बेहतर व्यवहार तथा पढ़ाई में भी काम आती है।

तो अब उस जुमले को विदा करने का वक्त आ ही गया है कि 'पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे हो जाओगे खराब'। जब खेलकूद पढ़ने-लिखने में मददगार हो तो बात तो यही हुई ना कि आपके दोनों हाथों में लड्डू हो सकते हैं...!

भीगे मौसम की सरल सावधानियां

भीगे मौसम की सरल सावधानियां
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बारिश के मौसम में बीमारियां अतिरिक्त सावधानी के बावजूद घर में आ जाती है। सर्दी-जुकाम तो आम बात है। विशेषकर अस्थमा के मरीज को यह मौसम बड़ा सताता है। बुजुर्ग भी कहते हैं सबसे मजाक करो, पर सर्दी से नहीं। अक्सर लोग सर्दी लगने पर ऐलोपैथिक दवाएं लेते हैं।

ऐलोपैथिक दवाएं शरीर के दर्द व बुखार को कम तो कर देती हैं, लेकिन सर्दी-जुकाम पर इनका खास असर नहीं होता। सर्दी लगने पर प्राकृतिक इलाज, चिकन सूप, सौंठयुक्त चाय, अदरक-लहसुन, प्राकृतिक विटामिन और जड़ी-बूटियों के सेवन से बहुत आराम मिलता है।

जिन लोगों को अस्थमा की शिकायत होती है उनके लिए सर्दी में चिकन सूप बहुत लाभदायक है। इसमें एमिनो एसिड होता है, जिससे सर्दी के दौरान अस्थमा में आराम मिलता है। इसकी भाप लेने से भी आराम मिलता है।

औषधि वाली चाय गर्म होती है। इसके सेवन से गले की खिचखिच में आराम मिलता है। दालचीनी, कालीमिर्च, जायफल, लौंग, अदरक या तुलसी की पत्ती डालकर बनाई गई चाय सर्दी-जुकाम में लाभकारी होती है।

हरी पत्तियों की चाय और काली चाय बहुत ही गुणकारी होती है। इसके सेवन से गले की खराश और सिरदर्द में आराम मिलता है।

खुशनुमा बरसात में रखें खास ख्याल

खुशनुमा बरसात में रखें खास ख्याल

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बारिश जहां माहौल को खुशनुमा बनाती है वहीं कई बीमारियों को दावत भी देती है। यही वक्त होता है जब मच्छर का प्रकोप बढ़ता है और लोग मलेरिया के शिकार हो जाते हैं। यदि मच्छरजनित इस बीमारी से बचना हो तो सावधानी और घरेलू उपाय करें। मसलन इन्हें घर के आसपास पनपने न दें। इसके लिए कुछ बातों पर जरूर गौर करें।


घर के चारों ओर पानी जमा न होने दें, गड्ढों को मिट्टी से भर दें, रुकी हुई नालियों को साफ करें।

अगर पानी जमा होने से रोकना संभव नहीं है तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन ऑयल डालें।

रूम कूलरों, फूलदानों का सारा पानी हफ्ते में एक बार और पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करें, उन्हें सुखाए और फिर भरें। घर में टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि न रखें। अगर रखें तो उल्टा करके रखें।

डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें।

अगर मुमकिन हो तो खिड़कियों और दरवाजों पर महीन जाली लगवाकर मच्छरों को घर में आने से रोकें।

मच्छरों को भगाने और मारने के लिए मच्छरनाशक क्रीम, स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि का प्रयोग करें। गुग्गल के धुएं से मच्छर भगाना अच्छा देसी उपाय है।


घर के अंदर सभी जगहों में हफ्ते में एक बार मच्छर-नाशक दवाई का छिड़काव जरूर करें। यह दवाई फोटो-फ्रेम्स, पर्दों, केलेंडरों आदि के पीछे और घर के स्टोर रूम और सभी कोनों में जरूर छिड़कें।


दवाई छिड़कते समय अपने मुंह और नाक पर कोई कपड़ा जरूर बांधें। साथ ही, खाने-पीने की सभी चीजों को ढककर रखें।

पीने के पानी में क्लोरीन की गोली मिलाएं और पानी को उबालकर पीएं।

5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं सावधानी से रहें।

ऐसे कपड़े पहनें, जिससे शरीर का ज्यादा-से-ज्यादा हिस्सा ढंका रहे। खासकर बच्चों के लिए यह सावधानी बहुत जरूरी है।

Tuesday, 8 July 2014

Health tips हेल्थ टिप्स:- मुंहासे के लिए गुणकारी लेप:-
-- मसूर की दाल 2 चम्मच लेकर बारीक़ पीस लें, इसमें थोडा सा दूध और घी मिलाकर फेंट लें और पतला-पतला लेप बना लें. मुंहासों के लिए यह अत्यंत लाभकारी लेप है. ---------------------------------------------------------------------------------

हेल्थ टिप्स HEALTH TIPS :-


सरसों के तेल में हल्दी का चूर्ण मिलाकर सोने से पहले दातों पर मलने से पायरिया, दांत और मसूड़े का दर्द, मसुडो से खून आना जैसी तकलीफें दूर हो जाती है.

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Health Tips हेल्थ टिप्स:-वायुमंडल की दुर्गन्ध दूर करें-


केले के छिलकों को सूखा कर रख लें. इनको शाम को जलाकर रखने से वायुमंडल की दुर्गन्ध दूर हो जाती है.

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Health Tips हेल्थ टिप्स:-"हंसना ही जिन्दगी है"

हंसने में कंजूसी स्वास्थ्य के लिए निश्चित रूप से हानिकारक है ,इसलिए हंसने मुस्कुराने में कभी कंजूसी मत कीजिये स्वयं हंसिये और दूसरों को भी खूब ह्साइए ...क्योंकि "हंसना ही जिन्दगी है".

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हेल्थ टिप्स:-
केला खाने के बाद २ इलायची खाने से केला आसानी से पच जाता है.

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Kitchen Tips किचन टिप्स:- बरकरार रहे हरापन...
कुछ दाने चीनी के डालकर पकाने से हरे चने ,हरे मटर आदि का रंग हरा ही बना रहता है.


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Health Tips हेल्थ टिप्स :- मुंहासे दूर करें.

दही में शहद मिलाकर उबटन की तरह मलने से मुंहासे दूर होते हैं.

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Health Tips हेल्थ टिप्स :- पेचिस होने पर...



पेचिस होने पर अदरक का रस नाभि में लगाने से आराम मिलता है.

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Health Tips हेल्थ टिप्स :- मुंह के छाले :-

-- मुलहठी का चूर्ण चबाने से मुंह के छालों में आराम मिलती है.

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Health tips हेल्थ टिप्स:- मुंहासे के लिए गुणकारी लेप:-





-- मसूर की दाल 2 चम्मच लेकर बारीक़ पीस लें, इसमें थोडा सा दूध और घी मिलाकर फेंट लें और पतला-पतला लेप बना लें. मुंहासों के लिए यह अत्यंत लाभकारी लेप है.

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हेल्थ टिप्स HEALTH TIPS  :- मसूड़ों से खून आना -

यदि मसूड़ों से खून आता है तो दो चम्मच सरसों तेल में थोडा सा नमक मिलाकर मसूड़ों पर मलें। कुल्ला न करें और लार को बहने दें। मसूड़ों से खून आने पर प्याज,खटाई,लाल मिर्च,मीठे पदार्थों का सेवन न करें.

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कब्ज व बवासीर से बचने का रामबाण कारगर नुस्खा :-

                            यदि आपको लगता है आप बवासीर के चंगुल में फंसने वाले है। आप कब्ज के रोगी हैं और मल त्याग करते समय काफी जोर लगाना पड़ता है। अपच व कब्ज के कारण मल कठोर होकर बाहर आता हो और गुदा द्वार फट जाता हो, तो हो सकता यह धीरे धीरे बवासीर का रूप धारण कर ले।
                           लीजिये प्रस्तुत है आपके लिए एक रामबाण कारगर नुस्खा जो आपको बवासीर के दलदल में फंसने से बचा सकता है।

नुस्खा -  नारियल, तिल या मूंगफली का तेल (ठण्ड के दिनों में सरसों का तेल) साफ उंगली या रुई में लगाकर गुदा में लगभग एक इंच अंदर डालकर अच्छे से लगा लें. 
इस प्रयोग को हर सप्ताह एक बार करें। इससे बवासीर व अन्य गुदा संबंधी विकार धीरे-धीरे खत्म हो जाता है. कब्ज के रोगियों के लिए तो यह प्रयोग अति लाभकारी है.

नोट- इस उपाय को किसी भी उम्र के बच्चे बड़े सभी कर सकते हैं.

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हेल्थ टिप्स - जानें टाइफाइड क्यों होता है ?

टाइफाइड एक भयानक संक्रामक रोग है। आज से करीब 70 पहले इस महामारी से हजारों लोग मर जाते थे, पर अब नई-नई दवाइयों के अविष्कार और विकास से इस पर काबू पा लिया गया है। टाइफाइड एक प्रकार के जीवाणु से फैलता है। आयुर्विज्ञान की भाषा में इसे बैसिलस सेलमोनेला टायफोसा कहते हैं। यह गंदे भोजन या गंदे पानी के साथ शरीर में प्रवेश कर खून तक पहुंच जाता है। यह खून को प्रभावित करके पूरी रक्त व्यवस्था को दूषित कर देता है।
इस बीमारी में बुखार, खांसी, खाल का उधड़ना, तिल्ली का बढ़ जाना और सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी हो जाना आदि होता है। इस बीमारी में भूख भी कम लगती है और लगातार बुखार रहता है। टाइफाइड की जितनी भी महामारियां फैली, उनमें से अधिकांश कुएं, तालाब आदि के पानी के दूषित होने से फैलीं।
टाइफाइड के जीवाणु पकने से पहले भोजन सामग्री में भी वाहक द्वारा पहुंच सकते हैं। मक्खियां भी इन जीवाणुओं को इधर से उधर पहुंचाती हैं। टाइफाइड की बीमारी ठीक हो जाने के बाद भी शरीर में ये जीवाणु बचे रह जाते हैं। टाइफाइड की जांच के लिए विडेल टेस्ट किया जाता है। इसमें खून की जांच की जाती है।