अच्छे नंबर लाना है तो खेलो-कूदो..!
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निष्कर्ष के तौर पर कहा गया कि शारीरिक कसरत से मस्तिष्क में रक्त व ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ जाती है। इससे मस्तिष्क पढ़ाई के लिहाज से भी तरो-ताजा रहता है। साथ ही कसरत से ऐसे हार्मोनों का स्त्राव होता है जो तनाव दूर करते हैं और मूड बेहतर बनाते हैं।
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तो अब उस जुमले को विदा करने का वक्त आ ही गया है कि 'पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे हो जाओगे खराब'। जब खेलकूद पढ़ने-लिखने में मददगार हो तो बात तो यही हुई ना कि आपके दोनों हाथों में लड्डू हो सकते हैं...!
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