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यही वजह है कि टीनएजर मुंहासे होने पर गहरे तनाव में घिर जाते हैं। ऐसी स्थिति में माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों पर इससे होने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभावों को समझें और जानें। जो माता-पिता बच्चों की इस समस्या को उचित मार्गदर्शन से सही कर सकते हैं उनके बच्चे इस समस्या से उबर सकते हैं।
मुंहासे जवानी में भी हो सकते हैं। लगभग 50 प्रश जवान महिलाएं और 25 प्रश पुरुषों को जवानी में यह समस्या निरंतर जकड़े रहती है। कई महिलाएं तो इनके कारण डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं। इन मुंहासे के होने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे वातावरण का प्रभाव, शारीरिक और हारमोन्स से संबंधित होने वाले बदलाव वगैरह। जिस समय व्यक्ति तनावग्रस्त होता है तो शरीर में कोर्टिसोल हार्मोंस का स्राव बढ़ जाता है जिसके कारण शरीर में त्वचा की ग्रंथियों से सीवम नामक हारमोन का स्राव ज्यादा होने लगता है जिसके कारण मुंहासे होते हैं।
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मुंहासों की समस्या यदि ज्यादा गंभीर होने लगे तो इसके लिए डॉक्टर से परामर्श करें। अपने भोजन और लाइफ स्टाइल में बदलाव करें। रिफाइंड काब्रोहाइडे्रट युक्त आहार व कैफीन मात्रा में लें। लो-फैट डाइट लें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। मुंहासे की समस्या को देखने का हर व्यक्ति का अपना नजरिया होता है। कुछ लोगों को यह एक बड़ी गंभीर समस्या लगती है उन्हें लगता है कि इससे उनका चेहरा भद्दा लगता है। इन्हें देखकर उन्हें गुस्सा आता है और वे तनावग्रस्त हो जाते है। स्त्री, पुरुष, किसी भी आयु वर्ग के, किसी भी देश के व्यक्ति मुंहासों की जद में आ सकते है।
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